Aarambh aur Prarabdh
आरंभ और प्रारब्ध
Aarambh aur Prarabdh
आरंभ ही प्रारब्ध है,
तो प्रारब्ध भी आरंभ है।
कौन है किसके साथ,
क्यूंकि साथ भी नहीं एक साथ,
इसलिए तो कहना पड़ता है—
हम हैं साथ।
जिस साथ में दम नहीं,
वो साथ में दम्भ है,
दम्भ घुट घुट कर घुटनों पे वार करता,
जो चलने से रेंगने पे आता है।
कुछ तो बात है बातों पर,
जो हर कोई कहता अपनी बातों पर,
बात वो नहीं एक वो कोई बात है,
बात यह कि क्या यह भी कोई बात है?
जिस बात में कोई सुकून नहीं,
वो बात अधूरी है,
क्यूंकि उसमें शोर नहीं,
और जो सुकून कहने को है,
वो सुर में कोई शोर ही नहीं।
हर आरंभ में हम प्रारब्ध ढूंढते हैं,
पर हर प्रारब्ध ही आरंभ का आरंभ है।
जवाब ही प्रारब्ध है,
और हर वो सवाल जिसका जवाब प्रारब्ध है,
वही आरंभ है।
~ Inked by d'pen

Nicely embedded words about destiny of evolution.answer of all our journey is destiny and what we have took is for question for destiny.
ReplyDeleteThank you for relating the topic nicely. Appreciate
ReplyDelete